Sad Shayari

कुछ नन्हे हाथों को आज हाथ छुडाते देखा है उन कोमल हाथों पे छालों का एक गुलदस्ता देखा है तपती कंकरीली धरती पे दिन भर रेंगते देखा है खाने के चंद निवालों पे मैंने उनको पिटते देखा है भूख मिटाने की खातिर यहाँ रूह नाचती देखी है हर गाडी में झांकती उनकी आस टपकती देखी है हंस कर जीने की आशा को आंसू में बहती देखी है एक सिक्के के खातिर मैंने ज़िन्दगी भागती देखी है - in Sad Shayari