Shayari
तेरी अदओ से हटके कुछ देखा है तेरी मदहोशी को पी के देखा है मुस्कुरा न यूहन तू खड़ी खड़ी ए ज़िंदगी! तेरे हर सितम मे जी के देखा है!लगता है जैसे साँसे थम सी रही है आँखों मॅ नींद है एन दिल मॅ करार मुस्कुरा रही है तू खड़ी खड़ी ए ज़िंदगी! तुझे मार के भी जिया है! तन्हाई से मेल हो रहा है खुद ही खुद से बोल रहा है मुस्कुराती क्यो है तू खड़ी खड़ी ए ज़िंदगी! तेरा हर विष पिया है! मुझे ले चल अपने संग कही तेरे बिन हर पलसुना लगता है हँसती है अब तू खड़ी खड़ी ए ज़िंदगी! तेरा मेरा कुछ तो रिश्ता है!!
Category: General Shayari        Posted On: 02-Jul-2010